
मैं वह औरत हूँ, जो खामोशी में भी शोर करती है,
जो टूटते हुए ख्वाबों को अपनी हिम्मत से जोड़ती है।
मेरी आँखों में आँसू भी हैं, और आग भी,
जो हर डर को पिघलाकर उम्मीद बनाती है।
मैं हर रोज़ नई दास्ताँ लिखती हूँ,
हर कदम पर दुनिया की चुनौतियों से लड़ती हूँ।
मेरी कमजोरियाँ मेरी ताकत बनती हैं,
और मेरे जज़्बात मेरे सपनों को उड़ान देते हैं।
मैं हँसती हूँ, गिरती हूँ, उठती हूँ,
हर दिन खुद को खोजती हूँ, और खुद को पाती हूँ।
मेरी आवाज़ सिर्फ मेरी नहीं,
हर उस औरत की है, जो चुपचाप दुनिया बदल रही है।
मैं एक कहानी हूँ, जो कभी खत्म नहीं होती,
एक संघर्ष, एक उम्मीद, और एक जीत की दास्ताँ।
मैं वह औरत हूँ, जो अपने लफ़्ज़ों में जीवन रचती है,
और हर उस दिल को छू जाती है, जो
सुनने को तैयार है।
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